मातृ मृत्यु दर घटाने पर जोर, डॉ. मनदीप कमल ने प्रभावी रणनीति अपनाने की बात कही

होशियारपुर (दलजीत अज्नोहा) : सिविल सर्जन होशियारपुर डॉ. मनदीप कमल की अध्यक्षता में मातृ मृत्यु समीक्षा (एम.डी.आर.) समिति की मासिक बैठक सिविल सर्जन कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक के दौरान एक मातृ मृत्यु (मेटरनल डेथ) मामले की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। मामले से संबंधित सभी तथ्यों एवं कारणों का विश्लेषण करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक सुझाव एवं निर्देश जारी किए गए।

डॉ. मनदीप कमल ने कहा कि प्रत्येक मातृ मृत्यु से सीख लेते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार लाना एम.डी.आर. समिति का मुख्य उद्देश्य है। बैठक में जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञों, ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों, मेडिकल अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, एल.एच.वी., ए.एन.एम. तथा अन्य संबंधित पैरामेडिकल कर्मचारियों ने भाग लिया।

बैठक के दौरान जिले में उपलब्ध मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की गई तथा मातृ मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करते हुए उनकी रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की गई। डॉ. मनदीप कमल ने कहा कि मातृ मृत्यु दर को कम करना स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सभी स्वास्थ्य कर्मियों को टीम भावना के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीकरण गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण में ही सुनिश्चित किया जाए तथा प्रथम, द्वितीय और तृतीय तिमाही के दौरान सभी आवश्यक जांच समय पर करवाई जाएं। गर्भवती महिलाओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां तथा अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं ताकि एनीमिया जैसी समस्याओं की रोकथाम की जा सके।

सिविल सर्जन ने कहा कि एनीमिया मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए प्रत्येक गर्भवती महिला की हीमोग्लोबिन जांच कर रक्त की कमी की पहचान और उसके उपचार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं और ए.एन.एम. को निर्देश दिए कि वे घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं के साथ नियमित संपर्क बनाए रखें तथा उन्हें समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए प्रेरित करें।

डॉ. मनदीप कमल ने जोर देकर कहा कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ा जाए। उन्होंने बताया कि उच्च रक्तचाप, गंभीर एनीमिया, पूर्व प्रसव के दौरान जटिलताओं अथवा अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी की जानी चाहिए।

बैठक में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्ट पार्टम हेमरेज-पी.पी.एच.) के कारण होने वाली मातृ मृत्यु पर भी विशेष चर्चा की गई। सिविल सर्जन ने कहा कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी उपचार जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके लिए प्रत्येक डिलीवरी प्वाइंट पर आवश्यक दवाइयों, रक्त की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्टाफ तथा आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था हर समय सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने रेफरल प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल देते हुए कहा कि किसी भी गंभीर मरीज को बिना देरी उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाए ताकि उसे समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सके।