"धरना मौतों पर प्रशासन अलर्ट, जांच रिपोर्ट की मांग तेज"

जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न): जगरांव के सिटी थाने के बाहर पिछले चार वर्षों से इंसाफ के लिए जारी अनिश्चितकालीन धरने ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। धरने के दौरान हुई 5 प्रदर्शनकारियों की मौत के मामले में पंजाब सूचना आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार के गृह विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

​थाना प्रभारी को चेतावनी भरा मांग पत्र: ​सोमवार को धरने पर बैठे पीड़ित परिवारों और विभिन्न न्याय-पसंद संगठनों के नेताओं ने थाना प्रभारी (SHO) इंस्पेक्टर परमिंदर सिंह से मुलाकात की। उन्होंने एक मांग पत्र सौंपते हुए स्पष्ट किया कि दोषियों पर कार्रवाई में देरी करना पीड़ितों के साथ एक और बड़ा अत्याचार है। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि वे इस गंभीर मुद्दे को उच्च अधिकारियों के समक्ष रखेंगे।

​पुलिसिया बर्बरता के गंभीर आरोप: ​संगठनों के नेताओं - निर्मल सिंह धालीवाल (देहाती मजदूर सभा), जसप्रीत सिंह ढोलण (सत्कार कमेटी), और भरपूर सिंह छज्जावाल (मजदूर संघर्ष कमेटी) -ने पुलिस प्रशासन को उन काले दिनों की याद दिलाई जब:

तत्कालीन थाना प्रभारी गुरिंदर सिंह बल और चौकी इंचार्ज राजवीर सिंह ने कथित तौर पर जातिगत दुर्भावना के चलते दो परिवारों को अवैध हिरासत में रखा।

​पीड़ित कुलवंत कौर को बिजली के झटके दिए गए और मनप्रीत कौर का यौन शोषण किया गया।
​इन अत्याचारों को छिपाने के लिए जाली गवाह और फर्जी दस्तावेज तैयार कर पीड़ितों को ही झूठे मुकदमों में फंसा दिया गया।

​"5 साथियों की शहादत के बावजूद प्रशासन मौन"
​मामले के मुख्य शिकायतकर्ता इकबाल सिंह रसूलपुर ने भावुक होते हुए कहा कि यह धरना 23 मार्च 2022 को दिवंगत किसान नेता तरलोचन सिंह झोरड़ां के नेतृत्व में शुरू हुआ था।

​"अब तक इस संघर्ष में हमारे 5 साथी अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूटी। अब सूचना आयोग द्वारा गृह विभाग से जवाब मांगना हमारी उम्मीद की एक नई किरण है।"

​दोषी पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग।
​झूठे मुकदमे रद्द करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने पर जोर।
​सूचना आयोग के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक हलकों में मची हलचल।