जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न): नगर परिषद जगरांव के पार्षदों और अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शहर की कमान संभालने वाली स्थानीय SDM मैडम उपिंदरजीत कौर बराड़ की पहली पारी उम्मीदों से उलट निराशाजनक नजर आ रही है। आज जब उन्होंने नगर परिषद का प्रशासनिक कार्यभार संभाला, तो जनता को उम्मीद थी कि लंबे समय से लंबित समस्याओं पर कोई ठोस 'एक्शन प्लान' सामने आएगा, लेकिन मीडिया के तीखे सवालों के सामने मैडम प्रशासक पूरी तरह से असहज और 'बैकफुट' पर दिखाई दीं।
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता अंदाज: "मैं अकेली क्या कर सकती हूँ?"
शहर की नारकीय बन चुकी सीवरेज व्यवस्था, सड़कों पर कूड़े के अंबार और बेकाबू ट्रैफिक जैसे गंभीर मुद्दों पर जब SDM से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने किसी कड़े प्रशासनिक तेवर के बजाय बेहद ही साधारण और टालने वाला लहजा अपनाया। उनके बयान में भविष्य की कोई ठोस रूपरेखा नहीं दिखी, बल्कि उन्होंने "काम धीरे-धीरे होंगे" और "स्टाफ के साथ होंगे" जैसे जुमले कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की। उनके मुख से निकले ये शब्द "मैं अकेली तो कुछ नहीं कर सकती"
प्रशासनिक अक्षमता और आत्मविश्वास की कमी को साफ बयां कर रहे हैं।
पहले ही दिन अधिकारियों की 'लापरवाही' को दिया संरक्षण
SDM के औचक निरीक्षण के दौरान कार्यकारी अधिकारी (EO) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का कार्यालय से नदारद होना पंजाब सरकार के 'समय की पाबंदी' के दावों की पोल खोलता है। हैरानी की बात यह रही कि अनुशासन का डंडा चलाने के बजाय SDM मैडम इन लापरवाह अधिकारियों का बचाव करती नजर आईं। अधिकारियों की अनुपस्थिति को "किसी और मीटिंग में व्यस्तता" का बहाना बनाकर उन्होंने साफ कर दिया कि उनके कार्यकाल में कामचोर अधिकारियों के हौसले पस्त होने के बजाय बुलंद रहने वाले हैं।
विवादों पर चुप्पी और गोल-मोल जवाब:-जब मीडिया ने नगर परिषद के पिछले विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनकी राय जाननी चाही, तो उन्होंने शालीनता का चोला ओढ़कर जवाबों को गोल-मोल घुमाना ही बेहतर समझा। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि यदि प्रशासक ही समस्याओं को हल करने के बजाय उन्हें "समय और स्टाफ" पर छोड़ देगा, तो जगरांव की जनता को नरक जैसी जिंदगी से निजात कब मिलेगी?
निष्कर्ष:
पदभार संभालते ही SDM के ढुलमुल रवैये ने शहरवासियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जिस "प्रशासनिक सुधार" का दावा किया जा रहा था, वह पहले ही दिन फाइलों और खोखले आश्वासनों में दबता नजर आया। अब देखना यह होगा कि क्या वाकई शहर का विकास होगा या फिर 'प्रशासक राज' में भी जगरांव की हालत "जस की तस" बनी रहेगी।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि आज एसडीएम मैडम बराड बिना किसी को बताए सिद्धि नगर परिषद जगरांव पहुंची और वहां पर मौजूद अधिकारियों से थोड़े समय में मीटिंग समाप्त कर अपने दफ्तर को रवाना हो गई।