पंचकूला: पंचकूला पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए डिजिटल अरेस्ट के जरिए फ्रॉड करने वाले गिरोह के एक सदस्य को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान पाथुकर मुरली कृष्ण, निवासी हैदराबाद के रूप में हुई है, जिसने फर्जी कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर ठगी की राशि को खपाने का काम किया था। इस मामले में एक आरोपी सौरभ कुमार वासी जिला मैनपुरी, उत्तरप्रदेश को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, जिससे पूछताछ में कई अहम सुराग मिले थे।
पिंजौर निवासी 70 वर्षीय रिटायर्ड सुपरवाइजर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि साइबर ठगों ने टीआरएआई, सीबीआई और महाराष्ट्र पुलिस का फर्जी अधिकारी बनकर फोन किया। ठगों ने पीड़ित को डराया कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक सिम कार्ड के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और भारी वित्तीय धोखाधड़ी की गई है। खुद को कानूनी पचड़े से बचाने और बैंक खातों की जांच कराने के नाम पर ठगों ने पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और डरा-धमकाकर अलग-अलग किस्तों में कुल 80,09,500 रुपये अपने बताए हुए खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाना में 19 जनवरी 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 319(2) के तहत मामला दर्ज किया। थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह के नेतृत्व में जांच अधिकारी एएसआई रविंदर ने टीम की मदद से तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच को आगे बढ़ाया। जांच के दौरान पुलिस को हैदराबाद स्थित जीएसआर कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर के एक संदिग्ध खाते का पता चला, जिसमें ठगी की पहली बड़ी किस्त (62 लाख रुपये) ट्रांसफर हुई थी। पुलिस टीम ने हैदराबाद में छापेमारी कर 2 मई को आरोपी मुरली कृष्ण को दबोच लिया। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने फर्जी रेंट एग्रीमेंट और पार्टनरशिप डीड तैयार कर यह कंपनी बनाई थी ताकि अवैध लेनदेन को वैध दिखाया जा सके। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से फर्जी दस्तावेज और रेंट एग्रीमेंट भी बरामद किए हैं। 3 मई को आरोपी को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह: इस मामले में हमने दूसरे आरोपी को हैदराबाद से गिरफ्तार किया है जिसने फर्जी कंपनियां बनाकर 80 लाख के फ्रॉड को अंजाम देने में मदद की। आम जनता को यह समझना होगा कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस कभी भी व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। यदि आपके पास ऐसा कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत 1930 पर संपर्क करें। हम इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटे हैं और जल्द ही उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।