लुधियाना (अशोक सहगल): खन्ना का सरकारी अस्पताल एक बड़ी उपलब्धि के साथ पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहा है। दिल के दौरे (स्टेमी) के इलाज में इस अस्पताल ने पिछले करीब तीन सालों में 100 मरीजों की जान बचाकर नया रिकॉर्ड कायम किया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ खन्ना सरकारी अस्पताल को पंजाब का नंबर-1 स्टेमी इलाज केंद्र माना जा रहा है।इस बड़ी उपलब्धि के मौके पर सिविल अस्पताल में खुशी का माहौल देखने को मिला।
एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन की अगुवाई में केक काटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया, जिसमें सिविल अस्पताल के सभी डॉक्टरों और स्टाफ ने भाग लिया।इस संबंध में जानकारी देते हुए एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन ने बताया कि यह प्रोजेक्ट पहले आईसीएमआर के तहत शुरू किया गया था, लेकिन अब पंजाब सरकार द्वारा इसे “मिशन अमृत” के तहत सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार में शुरू हुई यह योजना लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है।
डॉ. मनिंदर भसीन ने आगे बताया कि इस मिशन के तहत दिल के दौरे से पीड़ित मरीजों को 35 से 40 हजार रुपये की कीमत वाला जीवन रक्षक इंजेक्शन (टेनैक्टिप्लेस) सरकारी अस्पतालों में बिल्कुल मुफ्त लगाया जाता है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। इस प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डीएमसी लुधियाना के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विश्व मोहन हैं, जिनके मेडिकल मार्गदर्शन में इस योजना को और मजबूती मिली है।सिविल अस्पताल खन्ना की इस उपलब्धि के पीछे एक मजबूत और समर्पित मेडिकल टीम की अहम भूमिका रही है। एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन ने बताया कि इस टीम को मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. शायनी अग्रवाल लीड कर रहे हैं। उनके साथ इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. आकाश, डॉ. फ्रेंकी, डॉ. नवदीप जस्सल, डॉ. तारिका, डॉ. तारित बेरी, नर्सिंग सिस्टर कुलवीर कौर और अन्य स्टाफ नर्स लगातार मरीजों की सेवा में जुटे हुए हैं। इस टीम की मेहनत, अनुभव और समय पर किए इलाज ने 100 से अधिक जानें बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डॉ. मनिंदर भसीन ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति को छाती में दर्द या दिल से जुड़ा कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो वह तुरंत सरकारी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बताया कि खन्ना अस्पताल में तुरंत ईसीजी की जाती है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम रिपोर्ट के आधार पर तुरंत इलाज शुरू कर देती है। अगर मरीज में स्टेमी की पुष्टि होती है, तो मुफ्त जीवन रक्षक इंजेक्शन लगाकर उसे आगे के इलाज के लिए डीएमसी लुधियाना या सेक्टर-32 चंडीगढ़ के उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस इंजेक्शन को छाती में दर्द शुरू होने के 6 घंटे के भीतर लगाना जरूरी होता है।
यह उपलब्धि सिर्फ खन्ना अस्पताल की नहीं, बल्कि पंजाब सरकार की उस दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य हर नागरिक तक उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। मिशन अमृत जैसी योजनाएं साबित कर रही हैं कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।खन्ना सरकारी अस्पताल की यह सफलता अन्य अस्पतालों के लिए भी प्रेरणा है