भोपाल (Naren Danu) : श्रावण अमावस्या पर आसमान में बुधवार को एक दुर्लभ खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा। साल का सबसे बड़ा पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, जिसकी पूर्णता के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में दिन के समय कुछ देर के लिए रात जैसा अंधेरा छा जाएगा। खास बात यह है कि 27 साल बाद यूरोप के बड़े हिस्से में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। इससे पहले वहां 1999 में ऐसा नजारा देखने को मिला था।
मध्य प्रदेश की नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार भारतीय समयानुसार ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की रात 1:27 बजे समाप्त होगा। हालांकि भारत में उस समय रात होगी और सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए यह ग्रहण देश के किसी भी हिस्से से दिखाई नहीं देगा।
रूस से स्पेन-पुर्तगाल तक दिखेगा 'दिन में रात' का नजारा
ग्रहण के दौरान चंद्रमा की विशाल छाया पृथ्वी के बड़े हिस्से पर पड़ेगी। पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य मार्ग उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल से होकर गुजरेगा। इन क्षेत्रों में पूर्णता के दौरान दिन के समय ही रात जैसा अंधेरा देखने को मिलेगा।
इसके अलावा यूरोप के बड़े हिस्से, कनाडा और उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। अनुमान के मुताबिक दुनिया की करीब 12 प्रतिशत आबादी इस खगोलीय घटना को प्रत्यक्ष देख सकेगी।
भारत में ऑनलाइन देख सकेंगे अद्भुत नजारा
भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण खगोल प्रेमी इसे नासा और अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए देख सकते हैं। सारिका घारू ने लोगों से अपील की कि ग्रहण को लेकर किसी भी तरह के अंधविश्वास से बचें और इसे विज्ञान की दृष्टि से एक अद्भुत प्राकृतिक घटना के रूप में देखें।
अगला मौका 2027 में
सारिका के मुताबिक इस सूर्य ग्रहण के करीब 15 दिन बाद 28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण होगा, लेकिन वह भी भारत से दिखाई नहीं देगा। भारत में सूर्य ग्रहण देखने के लिए खगोल प्रेमियों को 2 अगस्त 2027 तक इंतजार करना होगा, जब देश के कुछ हिस्सों से आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।