श्रीनगर में तिरंगा यात्रा और तिरंगा महोत्सव को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अब जागरूकता का उत्सव और देशप्रेम की परंपरा बन चुका है। उन्होंने लोगों से तिरंगे को केवल घरों की छतों तक सीमित न रखने, बल्कि विचारों, चरित्र और कार्यों में भी इसकी भावना को जीवंत रखने का आह्वान किया। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों को राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताया।

श्रीनगर (Naren Danu) : जम्मू-कश्मीर में बुधवार को तिरंगे के रंग में देशभक्ति की नई तस्वीर देखने को मिली। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर के एसकेआईसीसी से तिरंगा यात्रा को हरी झंडी दिखाने के बाद बॉटनिकल गार्डन में आयोजित तिरंगा महोत्सव को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान अब महज एक सरकारी पहल नहीं रहा, बल्कि लोगों की जागरूकता का उत्सव और देशप्रेम की मजबूत परंपरा बन चुका है।

सिन्हा ने लोगों से अपील की कि तिरंगे की गरिमा केवल घरों की छतों तक सीमित न रहे, बल्कि उसके प्रति सम्मान विचारों, चरित्र और कर्मों में भी दिखाई दे।

‘लाखों घरों में तिरंगा, करोड़ों दिलों में एक भावना’

उपराज्यपाल ने कहा कि 2022 में शुरू हुए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उद्देश्य प्रत्येक भारतीय के मन में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करना है। जब लाखों घरों पर तिरंगा लहराता है तो सिर्फ ध्वज नहीं लहराता, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के दिल एक भावना, एक विश्वास और एक संकल्प से जुड़ते हैं।

उन्होंने कहा कि यह अभियान हर भारतीय को मातृभूमि से और गहराई से जोड़ने वाली देशभक्ति की परंपरा बन गया है।

‘तिरंगा देश की आत्मा, वंदे मातरम् उसकी अमर आवाज’

सिन्हा ने कहा कि इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ के साथ ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर तिरंगा हमारे देश की आत्मा है तो वंदे मातरम् उस आत्मा की अमर आवाज है।”

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब विदेशी ताकतों ने भारतीयों के आत्मविश्वास को कुचलने का प्रयास किया, तब यही गीत अनगिनत देशभक्तों की आवाज बना। ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ केवल एक गीत को सम्मान देने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, आत्मविश्वास, साहस और आत्मसम्मान को नमन करने का पर्व है।

जम्मू-कश्मीर के युवाओं की भागीदारी को सराहा

उपराज्यपाल ने ‘वंदे मातरम्’ अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए जम्मू-कश्मीर के लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं और नागरिकों की भागीदारी पूरे देश के लिए प्रेरणा बन रही है।

उन्होंने कहा कि बांदीपोरा, बारामूला, पुलवामा, पुंछ, राजौरी, किश्तवाड़, जम्मू और श्रीनगर जब एक साथ राष्ट्रभक्ति के इस अभियान से जुड़ते हैं तो भारत का आत्मविश्वास और मजबूत होता है।

सिन्हा ने कहा कि उन्हें गर्व है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने इस अभियान में केंद्र शासित प्रदेश को देश में अग्रणी बनाने में योगदान दिया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगले चरण में भी जम्मू-कश्मीर को नंबर वन बनाए रखने के लिए इसी उत्साह के साथ भागीदारी जारी रखें।

देशभक्ति सिर्फ नारे में नहीं, चरित्र में भी दिखे

सिन्हा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान लोगों को आत्ममंथन के लिए भी प्रेरित करते हैं। हर नागरिक को खुद से पूछना चाहिए कि क्या वह उस भारत के निर्माण में योगदान दे रहा है, जिसके लिए स्वतंत्रता सेनानियों और वीर जवानों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया।

उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने देश की रक्षा अपने खून, पसीने और आंसुओं से की, अब नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे ईमानदारी, समर्पण, एकता और सेवा भावना के जरिए राष्ट्र को मजबूत करें। यही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

‘नए जम्मू-कश्मीर की पहचान बन चुका है हर घर तिरंगा’

उपराज्यपाल ने कहा कि इस वर्ष ‘वंदे मातरम्’ और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान केवल दो राष्ट्रीय कार्यक्रमों का संगम नहीं हैं, बल्कि नए जम्मू-कश्मीर की नई सोच और नई दिशा का प्रतीक हैं।

उन्होंने कहा कि आज का जम्मू-कश्मीर विश्वास, विकास और मातृभूमि के प्रति समर्पण के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। यह आत्मविश्वास से भरा जम्मू-कश्मीर है, जो भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।

सिन्हा ने लोगों से संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि तिरंगा केवल जम्मू-कश्मीर की छतों पर नहीं, बल्कि हर नागरिक के विचारों, चरित्र और कर्मों में भी हमेशा ऊंचा रहना चाहिए।

उन्होंने समृद्ध, सुरक्षित और न्यायपूर्ण भारत के निर्माण का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा देश बनाया जाए जहां हर नागरिक को समान अवसर मिले और जम्मू-कश्मीर के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए सभी मिलकर काम करें।