"घाट क्षेत्र में रहने वालों को नोटिस, 310 मकान खाली करने के निर्देश"

नई दिल्ली: राजधानी नई दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए घाटों पर बने करीब 310 मकानों को खाली करने का निर्देश जारी किया है।

कार्रवाई क्यों ?
यमुना बाजार के घाटों पर अतिक्रमण
नदी के प्राकृतिक प्रवाह और सफाई में बाधा हटाना
मानसून से पहले बाढ़ के खतरे को कम करना
यह जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की है


दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यमुना बाजार घाट क्षेत्र में 32 घाट हैं, इन घाटों पर अतिक्रमण कर लिया गया है। क्षेत्र में लगभग 310 आवासीय मकान हैं, जिनमें करीब 1100 लोग रहते हैं। यमुना बाजार की चारदीवारी के अंदर, यमुना नदी के किनारे स्थित यमुना बाजार के घाटों के बाढ़-मैदान वाले क्षेत्र 'ओ जोन' के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने कहा कि यह जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की है और यहां निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित है।


अधिकारी ने बताया कि एनजीटी ने डीडीए को निर्देश दिया है कि वह यमुना के बाढ़-मैदानों में किए गए ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटा दे, इसी निर्देश के तहत पिछले कुछ वर्षों में डीडीए ने ओजोन में स्थित कई आवासीय और व्यावसायिक इकाइयों को हटाकर जमीन का एक बड़ा हिस्सा वापस हासिल कर लिया है।

विज्ञप्ति के मुताबिक, हर साल यमुना में बाढ़ (विशेषकर 2023 व 2025) के दौरान यह जलमग्न हो जाता है, जिससे मानव जीवन, मवेशियों और संपत्ति के नुकसान का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। यहां राजस्व विभाग द्वारा अस्थायी स्थानांतरण और पुनर्वास करना पड़ता है, जिसके परिणामस्वरूप जनता पर दबाव पड़ता है। बार-बार आने वाली बाढ़ के लिए संसाधनों और सरकारी खजाने सहित आपातकालीन प्रतिक्रिया उपायों की आवश्यकता होती है. इसलिए अब डिज़ास्टर मैनेजमेंट एक्ट-2005 के सेक्शन 34 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यमुना घाट पर कब्जा किए हुए इलाके में कब्जा किए लोगों को नोटिस जारी किया गया है। मौके पर मौजूद पाए गए लोगों को कुल 26 नोटिस जारी किए गए हैं। यह नोटिस जारी होने की तारीख से 15 दिनों के अंदर और किसी भी हालत में उस जगह को तुरंत खाली करने का निर्देश देता है।