जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न): स्थानीय दीवानी कचहरी में राष्ट्रीय कानूनी सेवाएं अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों के तहत लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस अदालत में पारिवारिक झगड़ों, बैंक रिकवरी और दीवानी मामलों को आपसी सहमति से सुलझाने पर जोर दिया गया।
न्यायिक अधिकारियों की सक्रिय भूमिका: लोक अदालत के सफल आयोजन में जगरांव के वरिष्ठ और कनिष्ठ जजों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन लोक अदालतों की अध्यक्षता मुख्य रूप से निम्नलिखित जजों द्वारा की गई: माननीय सुमुखी एडिशनल सिविल जज (सीनियर डिवीजन), माननीय रिफी भट्टी सिविल जज (जूनियर डिवीजन), माननीय गुलफाम सिविल जज (जूनियर डिवीजन), जगरांव।
प्री-लिटिगेटिव केस: 100% निपटारा:
अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धि 'प्री-लिटिगेटिव' (अदालत में पहुंचने से पहले के मामले) श्रेणी में रही।
निपटाए गए मामले: 737,
रिकवरी राशि: ₹2,81,437/-
प्री-लिटिगेटिव श्रेणी में 100% निपटारा दर्ज किया गया, जो नागरिकों के बीच आपसी समझ और कानूनी जागरूकता का प्रमाण है।
लंबित मामलों (Pending Cases) का विवरण: अदालतों में पहले से चल रहे मामलों को भी प्राथमिकता दी गई।
कुल लंबित मामले उठाए गए: 183, मौके पर सुलझाए गए मामले: 66, अवार्ड राशि (सेटलमेंट): ₹1,76,50,329/- (एक करोड़ छिहत्तर लाख पचास हजार तीन सौ उन्नतीस रुपये)
लोक अदालत का संदेश: इस अवसर पर न्यायाधीशों ने बताया कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य लोगों के समय और पैसे की बचत करना है। यहाँ होने वाले फैसले की कोई अपील नहीं होती, जिससे कानूनी विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है और आपसी भाईचारा बना रहता है।