खुद को पंजाब का बेटा कहने वाले मुख्यमंत्री को क्या हमारी तकलीफें नहीं दिखतीं?"-मिशरो देवी

​जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न): आज जहां पूरा देश 'मदर्स डे' (Mothers Day) के जश्न में डूबा है और हर कोई अपनी मां के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहा है, वहीं पंजाब की सड़कों पर अपनी मांगों के लिए संघर्ष कर रही सफाई सेवक माताएं सरकार की बेरुखी से आहत हैं।

​सफाई सेवक यूनियन पंजाब (शाखा जगरांव) की महिला अध्यक्ष मिशरो देवी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए उनके "पंजाब का बेटा" होने के दावे पर सवाल खड़े किए हैं।

​प्रमुख मुद्दे और उठाई गई मांगें: ​मिशरो देवी ने मुख्यमंत्री को उनके वादे याद दिलाते हुए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर सरकार को घेरा:

​खोखले चुनावी वादे: मुख्यमंत्री बनने से पहले भगवंत मान रैलियों में बुजुर्ग महिलाओं को अपनी मां बताकर उनके दुख दूर करने की कसमें खाते थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद वही 'माताएं' सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर हैं।

​पुरानी पेंशन की बहाली: मांग की गई कि पुरानी पेंशन योजना को तुरंत बहाल किया जाए ताकि सालों तक पंजाब की गलियां साफ करने वाली इन माताओं को बुढ़ापे में किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।

​कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना: 10 साल की पॉलिसी और ठेकेदारी प्रथा को खत्म कर आउटसोर्सिंग व कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रही महिलाओं को नियमित (Regular) करने की पुरजोर मांग की गई।

​"दुआएं कुर्सी पर बिठा सकती हैं, तो बद्दुआएं उतार भी सकती है मिशरो देवी ਨੇ भावुक होते हुए चेतावनी भरे लहजे से कहा के
​"मां रब का रूप होती है। भगवंत मान जी, याद रखिएगा कि इन माताओं की दुआओं ने ही आपको मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया है। अगर मां का आशीर्वाद किसी को शिखर पर बिठा सकता है, तो दुखी मां के दिल से निकली बद्दुआ कुर्सी से उतारने की ताकत भी रखती है।"

​नैतिक अधिकार पर सवाल: ​यूनियन अध्यक्ष ने साफ कहा कि यदि मुख्यमंत्री सफाई कर्मचारियों के हक में फैसला नहीं ले सकते, तो उन्हें खुद को "पंजाब का पूत " कहलाने कोई अधिकार नहीं है। जगरांव में आयोजित इस धरने के दौरान सफाई सेवक महिलाओं ने पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए रोज प्रदर्शन किया।